Tally.ERP 9 में 34 ग्रुप पहले सी ही मौजूद होते हैं अगर आप चाहे तो इसमे और ग्रुप बना सकते हैं अपने बिजनेस के हिसाब से और पहले से बने हुए ग्रुप को भी बदल सकते हैं। और टैली में 22 Voucher होते हैं। Groups और Voucher निम्नलिखत है।
बैंक से संबंधित कोई भी कार्य किया जाता है तो इसका ग्रुप बैंक अकाउंट में रखा जाता है।
जब किसी भी बैंक से लोन लिया है तो इसका ग्रुप बैंक OCC A/c या बैंक ODD A/c दोनों से किसी भी एक में रखा जाता है।
जब किसी भी बैंक से लोन लिया है तो इसका ग्रुप बैंक OCC A/c या बैंक ODD A/c दोनों से किसी भी एक में रखा जाता है। इन दोनों का कार्य एक ही होता है।
जब किसी भी कंपनी की अलग-अलग राज्यों में कई ब्रांच होती है तो Branch Division के माध्यम से Account Open कर सकता है, इस तरह के अकाउंट को Branch Division में रखा जाता है।
जब भी कोई व्यक्ति अपना व्यापर शुरू करने के लिए जो धनराशि अपने व्यापर में लगाता है, तो इसका Ledger Capital A/c में रखा जाता है।
व्यापार में (नकद रोकड़) जो राशि प्राप्त होती है, तो इसका Ledger Cash-in-Hand ग्रुप में रखा जता है।
ऐसी संपत्ति जो कंपनी की बैलेंस शीट जो जरूरी वित्तीय निवेश होता है, जिसे अनिवार्य रूप से एक वर्ष में पूरा किया जाना होता है, इसमें कैश, कैश इक्विवैलेंट्स, अकाउंट रिसीवेबल्स, स्टॉक इन्वेंटरी, मार्केटेबल सिक्योरिटीज, प्री-पेड लायबिलिटी और अन्य लिक्विड एसेट शामिल होते हैं। यह Current Assets कहलाते हैं।
वर्तमान देनदारियां यह कंपनी के दायित्व हैं जो एक वर्ष के अन्दर भुगतान किए जाने की उम्मीद है, और देनदारियों जैसे खाते देय, अल्पावधि ऋण, देय ब्याज, बैंक ओवरड्राफ्ट और कंपनी की अन्य ऐसी अल्पकालिक देनदारियां शामिल हैं। यह Current Liabilities कहलाती है।
वह सम्पत्ति जो किसी कंपनी के लिए लंबे समय से खरीदी हुई।
जमीन या Building (Property) कुछ भी हो। या आपने लम्बे समय किसी जगह पर किया हुआ निवेश भी हो सकता है। जैसे आपने किसी म्यूच्यूअल फंड में लम्बे समय के लिए निवेश किया हो या फिर 1 साल से ज्यादा की Fixed Deposit आदि। यह Deposit Assets कहलाती है।
यदि किसी भी व्यवसाय (Business) में किसी भी वस्तु का निर्माण होता है। तो वह वस्तु के निर्माण कार्य के समय में लगने वाले :- Wages Expenses, Purchase of Raw material Expenses, Gas & Fuel Expenses आदि। व्यय प्रत्यक्ष व्यय (Direct Expenses) कहलाते है।
यह प्रत्यक्ष आय होती है। Direct Income ऐसी आय से होती है। जो हमे व्यवसाय में सीधे माल बिक्री (Goods Sale) करने के पश्चात होती है। जैसे :- यदि हमारी एक स्टेशनरी की दुकान है और दुकान मे रखे हुए किसी पेन की थोक कीमत 4 रू है, और हम उस पेन को 5 रू मे बेचते हैं।
तो हमें सीधे 1 रुपये का फायदा हुआ यह Direct Incomes कहलाती है।
किसी भी प्रकार का Tax जैसे-देश के अंदर गुड्स के प्रॉडक्शन और उसकी बिक्री पर लगता है. इस टैक्स को सेन्ट्रल वैल्यू ऐडेड टैक्स (CENVAT) के नाम से भी जाना जाता है, बिक्री माल पर लगाये गये Taxes के Ledger Duties & Taxes Group में रखे जाते हैं।
यदि किसी भी व्यवसाय (Business) में किसी भी वस्तु का निर्माण होता है। तो वह वस्तु के निर्माण कार्य के समय में लगने वाले :- Wages Expenses, Purchase of Raw material Expenses, Gas & Fuel Expenses आदि। व्यय प्रत्यक्ष व्यय (Direct Expenses) कहलाते है। Direct Expenses और Expenses Direct दोनो एक ही लेजर है।
या Indirect Expenses अप्रत्यक्ष व्यय, (खर्च) हैं। किसी व्यवसाय में अप्रत्यक्ष व्यय मतलब (Indirect Expenses) ऐसे व्यय है। जो माल (Goods) खरीदी (Purchase) से संबंधित नहीं होते हैं। अर्थात अप्रत्यक्ष व्यय (Indirect Expenses) मे उन व्ययों (खर्चो) को शामिल किया जाता है।
वह एसेट्स और उपकरण जिसका उपयोग एक व्यवसाय अपनी आय बढ़ाने के लिए करता है। हम अचल संपत्तियों की एक और परिभाषा दे सकते हैं जैसे वह संपत्तियां जो एक वर्ष के अन्दर बेची नहीं जा सकती हैं। यह Fixed Assets कहलाती है।
यह प्रत्यक्ष आय होती है। Direct Income ऐसी आय से होती है। जो हमे व्यवसाय में सीधे माल बिक्री (Goods Sale) करने के पश्चात होती है। जैसे :- यदि हमारी एक स्टेशनरी की दुकान है और दुकान मे रखे हुए किसी Biscuit की थोक कीमत 9 रू है, और हम उस Biscuit को 10 रू मे बेचते हैं। तो हमें सीधे 1 रुपये का फायदा हुआ यह Direct Incomes कहलाती है। Direct Income और Income(Direct) ये दोनो भी एक ही लेजर है
यदि हमारे व्यवसाय मे कुछ भी Waste (बेकार सामान) बेचने से कुछ आय होती है। तो ये अप्रत्यक्ष आय Income Indirect कहलाती है। या हमें बैंक dwara कोई Interest प्राप्त होता है तो यह Indirect Income में दर्ज की जायेगी है।
या Expenses Indirect अप्रत्यक्ष व्यय, (खर्च) हैं। किसी व्यवसाय में अप्रत्यक्ष व्यय मतलब (Indirect Expenses) ऐसे व्यय है। जो माल (Goods) खरीदी (Purchase) से संबंधित नहीं होते हैं। अर्थात अप्रत्यक्ष व्यय (Indirect Expenses) मे उन व्ययों (खर्चो) को शामिल किया जाता है। ये दोनो भी एक ही लेजर है
निवेश एक वस्तु, संपत्ति, उत्पाद या कोई अन्य संपत्ति है जिसे भविष्य में आय उत्पन्न करने के लिए खरीदा या उपयोग किया जाता है। एक निवेश किसी भी प्रकार की खरीद हो सकता है जैसे स्टॉक, संपत्ति, व्यवसाय इत्यादि। निवेशित संपत्ति का अधिकतर उपभोग नहीं किया जाता है बल्कि भविष्य की संपत्ति बनाने के लिए रखा जाता है। यह Investment कहलाती है।
| Loans & Advances (Asset)👇 |
ऋण एवं अग्रिम का अर्थ (Meaning of Loans and Advances): बैंक आस्तियों का एक बहुत बडा भाग (Loans and Advances) के रूप में विनियोजित किया जाता है। ऋण एवं अग्रिम पर बैंकों द्वारा ऊंची दर से ब्याज वसूला जाता है, क्योंकि ये कम तरल (Less Liquid) होते हैं जबकि इनमें जोखिम की अधिक संभावना होती है । यह Loans & Advances कहलाते हैं।
आसान भाषा में liability का मतलब है कर्ज लेना। जैसे कोई व्यक्ति अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन लेते हैं या किसी भी दूसरे व्यक्ति से उधार कर्ज लेते हैं या किसी तरह का सामान अगर हम किसी से मंगवाते है, और उन्हें पैसा बाद में देते हैं, तो यह सारी प्रक्रिया liabilities ही कहलाती है।
ऐसे खर्चे जो हमें चुकाने होते है लेकिन, हमें जिस व्यक्ति को पैसे चुकाने है, और वह व्यक्ति काम छोड़ कर चला गया अब हमें ये नहीं पता कि वह आएगा या नहीं तो हम उस व्यक्ति के पैसे Misc(Expenses)में रखेंगे जब वह व्यक्ति कभी भी आयेगा तब हम उसके पैसे चुका देंगे।
जब कोई कंपनी का व्यापार शुरू किया जाता हैं। तो उस व्यापार के संचालन (शुरुआत) करने के लिए भविष्य में कभी भी होने वाले निश्चित ख़र्चे के लिए राशि (धन) को अलग से निकाल कर रख लेते हैं। उसे Provisions कहते हैं।
रिजर्व्स का मतलब है वो रकम जो कंपनी ने किसी खास वजह के लिए रखी है, और इसका इस्तेमाल भविष्य में होना है। सरप्लस वो है जहां पर कंपनी के मुनाफे को दिखाया जाता है। कंपनी के बैलेंस शीट और Profit & Loss दोनों में इसका इस्तेमाल होता है। वित्तीय लेखांकन में एक रिजर्व मूल शेयर पूंजी को छोड़कर, शेयरधारकों की इक्विटी का एक घटक है। एक रिजर्व उस राशि का एक हिस्सा है जिसे किसी विशेष लक्ष्य की पूर्ति के लिए आवंटित किया गया है। लेखांकन में, रिजर्व शब्द का उपयोग भविष्य के कार्यों जैसे बोनस का भुगतान, संपत्ति खरीदने और कानूनी शुल्क का भुगतान करने के लिए अलग रखी गई राशि का वर्णन करने के लिए किया जाता है। सरप्लस का मतलब है एक संपत्ति या संसाधन के उस हिस्से का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो सक्रिय रूप से उपयोग की जा रही राशि से अधिक है। बजट के संदर्भ में, सरप्लस एक शब्द है जिसका उपयोग उपयोग की जा रही राशि से अधिक राशि का वर्णन करने के लिए किया जाता है। सरप्लस तब होता है जब अर्जित आय की राशि खर्च किए गए खर्चों से अधिक हो जाती है।
Business (व्यवसाय) में भविष्य में होने वाले खर्चों और हानियों को पूरा करने के लिए लाभों मे कुछ हिस्सा रोक कर रखा जाता है। लाभ के रोके गये इस हिस्से को अलग-अलग नामों से रखा जा सकता है। जैसे:- General Reserve, Capital Reserves, Reserve for Decpreciation Sales Accounts
इस तरह का Loan देने के लिए Bank आपसे कोई चीज गिरवी रखवाती है। जैसे आप किसी तरह की संपत्ति गिरवी रखकर ही Secured Loan प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के Loan में आपके द्वारा कोई Security रखी जाती है इसीलिए इसे Secured Loan के नाम से जाना जाता है। यह Property के against दिया जानेवाला Loan है।
माल से जुडे़ खातों को Stock in Hand Group में रखा जाता है। इसमें कच्चा माल, अर्द्धनिर्मित माल, तैयार माल आदि के सभी स्टाॅक को शामिल किया जाता है।
विविध लेनदार - जब हम किसी व्यक्ति अथवा किसी संस्था से उधार माल खरीदते है। और उस खरीदे हुए माल का पैसा हमें चुकाना होता है। तो वह हमारा Sundry Creditors कहलाता हैै।
विविध देनदार - ये वो होते है जिनसे कंपनी या किसी संस्था को पैसे वसूलना होता है। देनदार एक व्यक्ति संस्था या कंपनी हो सकती है। कंपनी जिन ग्राहकों को शर्तो के अनुसार उधारी में माल देती है। Sundry Debtors कहलाते है।
यह एक अस्थायी खाता है जो किसी खाते की पुस्तकों में त्रुटि या त्रुटियों के कारण परीक्षण संतुलन में विसंगतियों को ठीक करने के लिए स्थापित किया जाता है, जबकि लेनदेन के सटीक स्थानों की पहचान की जा रही है।
जब कोई लोन बिना किसी गारंटी के दिया जाता है, तो वह अनसेक्योर्ड लोन होता है। इस लोन में ग्राहक से किसी तरह की गारंटी नही ली जाती, बैंक अनसेक्योर्ड लोन ग्राहक का क्रेडिट स्कोर देखकर देते हैं, इसमें बैंक ग्राहक की पिछली रिपेमेंट हिस्ट्री, इनकम सोर्स, पिछली सैलरी स्लिप्स या इनकम टैक्स रिटर्न जैसे फैक्ट्स देखकर इसी आधार पर लोन मंजूर करता है. अनसेक्योर्ड लोन में सिक्योर्ड लोन की अपेक्षा ब्याज दर अधिक होती है और इनका लोन चुकाने का समय कम रहता है।